बीमारे- ग़म है, फिर भी साज़े -उलफ़त बजाना नहीं आता । ना रूठा किजिए यूँ हमसे , के हमें म बीमारे- ग़म है, फिर भी साज़े -उलफ़त बजाना नहीं आता । ना रूठा किजिए यूँ हमसे ,...
कविता लिखना चाहती हूं कविता लिखना चाहती हूं
गाड़ी,बंगले और हीरों के हार से कम उन्हें कुछ भाता नहीं, दिल में जो है जुबां पर वो ला गाड़ी,बंगले और हीरों के हार से कम उन्हें कुछ भाता नहीं, दिल में जो है जुब...
टते वक़्त सूरज के साथ दौड़ लगाना मेरा प्रातः उठते गोबर के गेंद दीवारों पर चिपकाना मेरा टते वक़्त सूरज के साथ दौड़ लगाना मेरा प्रातः उठते गोबर के गेंद दीवारों पर चिपका...
पूरे हफ्ते के इंतज़ार के बाद आता है एक इतवार पूरे हफ्ते के इंतज़ार के बाद आता है एक इतवार
फूटे कंठ से रुदन के प्याले , घर आँगन में बिखरे जाएं। फूटे कंठ से रुदन के प्याले , घर आँगन में बिखरे जाएं।